०१
पलक-ठहराव
स्क्रीन पर ध्यान लगाते समय हम अक्सर कम पलकें झपकाते हैं। कुछ पल के लिए स्क्रीन से नज़र हटाइए और कुछ बार धीरे-धीरे, पूरी तरह पलकें बंद करके खोलिए। फिर दो-तीन सेकंड आँखें हल्के से बंद रखिए।
- कितनी देर
- लगभग आधा मिनट
- यह क्या नहीं करता
- सूखी आँख की बीमारी का इलाज नहीं है।
०२
20-20-20 की याद
यह एक जानी-मानी याद रखने वाली आदत है: क़रीब हर 20 मिनट के काम के बाद, लगभग 20 सेकंड के लिए, क़रीब 20 फ़ुट (लगभग 6 मीटर) दूर किसी चीज़ को देखिए — गली का पेड़, सामने की इमारत, आसमान।
- कितनी देर
- लगभग 20 सेकंड
- यह क्या नहीं करता
- नज़र का नंबर नहीं बदलता; यह सिर्फ़ ठहराव की याद है।
०३
पास-दूर फ़ोकस
अपना अँगूठा हाथ की दूरी पर आँखों के सामने रखिए और कुछ पल उस पर देखिए। फिर नज़र कमरे या खिड़की के बाहर किसी दूर चीज़ पर ले जाइए। कुछ बार आराम से बदलते रहिए, जल्दबाज़ी के बिना।
- कितनी देर
- लगभग एक मिनट
- यह क्या नहीं करता
- चश्मा या लेंस छोड़ने का रास्ता नहीं है।
०४
हथेलियों की ओट
साफ़ हाथों को आपस में रगड़कर हल्का गर्म कीजिए। कोहनियाँ मेज़ पर टिकाइए और कप जैसी हथेलियाँ बंद आँखों के ऊपर रखिए — आँखों को छुए या दबाए बिना। अँधेरे में धीरे-धीरे साँस लीजिए।
- कितनी देर
- एक-दो मिनट
- यह क्या नहीं करता
- आँखों के दर्द या सूजन का उपाय नहीं है।
०५
धीमी चारों ओर नज़र
सिर स्थिर रखकर नज़र धीरे से ऊपर, फिर नीचे, फिर दाईं और बाईं ओर ले जाइए, जितना आराम से जाए उतना ही। हर दिशा में एक पल रुकिए। चक्कर-सा लगे तो उसी समय बंद कर दीजिए।
- कितनी देर
- लगभग एक मिनट
- यह क्या नहीं करता
- भेंगापन या आँखों की मांसपेशियों की समस्या का इलाज नहीं है।
०६
हरियाली की ओर
दिन में कम से कम एक बार खिड़की, छत या बालकनी तक जाइए और दूर पेड़ों, खेत या आसमान की ओर कुछ देर देखिए। सूरज की ओर सीधे नहीं। यह छोटा-सा बाहर जाना पूरे शरीर को भी थोड़ा हिलने का मौक़ा देता है।
- कितनी देर
- दो-तीन मिनट
- यह क्या नहीं करता
- आँखों की जाँच की जगह नहीं लेता।